"सोसाइटी फॉर एम्पावरमेंट" द्वारा "सकारात्मक युवा विकास में युवाओं की भागीदारी" पर ऑनलाइन वेबिनार का हुआ आयोजन

मेट्रो मत न्यूज़ संवाददाता चेतन शर्मा :- पटना बिहार।  "सोसाइटी फॉर एम्पावरमेंट" द्वारा "सकारात्मक युवा विकास में युवाओं की भागीदारी" शीर्षक से एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सशक्त बनाना, नेतृत्व कौशल विकसित करना, युवाओं के लिए भागीदारी के अवसर प्रदान करना, और उन्हें राष्ट्रीय व वैश्विक विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भागीदार बनाना था।वेबिनार में प्रमुख वक्ताओं ने अपने अनुभव और विचार साझा किए, जिनमें शामिल थे,  एन.एन. पांडे, भिक्षु प्रज्ञदीप, प्रोफेसर एस. नारायण, और प्रोफेसर अनिल प्रसाद। वक्ताओं ने युवाओं के नेतृत्व क्षमता को विकसित करने के लिए संरचित ढांचे, नैतिक सिद्धांतों और समावेशी दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया।

वेबिनार की शुरुआत और मुख्य विषय

कार्यक्रम का शुभारंभ भिक्षु प्रज्ञदीप के प्रेरक उद्घाटन वक्तव्य से हुआ। उन्होंने युवाओं के समाज में बदलाव लाने की अद्वितीय क्षमता पर प्रकाश डाला। भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए, उन्होंने युवाओं में भावनात्मक बुद्धिमत्ता, आत्म-जागरूकता और लचीलापन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को करुणा और न्याय के मूल्यों को अपनाकर समाज में शांति और समरसता लाने का प्रयास करना चाहिए।एन.एन. पांडे, एक प्रमुख वक्ता, ने भारत में युवा विकास के व्यापक संदर्भ पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत सरकार के सशक्तिकरण कार्यक्रम की जानकारी दी, जो युवाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न पहलों का एक व्यापक ढांचा है। इनमें नेशनल यूथ कोर, नेशनल यंग लीडर्स प्रोग्राम, और कई अन्य पहलें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम ग्रामीण, शहरी और आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को कौशल विकास, नेतृत्व के अवसर, और वैश्विक मंच प्रदान करते हैं।प्रोफेसर अनिल प्रसाद ने रूलर फ्रेमवर्क पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें शामिल हैं: पहचान , समझ , सीखना , प्रतिक्रिया ।उन्होंने बताया कि यह फ्रेमवर्क युवाओं में भावनात्मक बुद्धिमत्ता, स्वयं पर निर्भरता और नैतिक उत्तरदायित्व विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने युवाओं को नीति-निर्माण और सामुदायिक सेवा में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।प्रोफेसर एस. नारायण ने चर्चा को और विस्तार देते हुए अंतर-पीढ़ी सहयोग की आवश्यकता और समावेशी मंचों के निर्माण की बात की, जो युवाओं की आकांक्षाओं और समाज की अपेक्षाओं के बीच सेतु का काम कर सके। उन्होंने कहा कि मार्गदर्शन, कौशल विकास, और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग के माध्यम से युवा न केवल अपने जीवन को बल्कि समाज को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

सार्वभौमिक शिक्षाओं से प्रेरणा

वेबिनार के दौरान वक्ताओं ने भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु नानक, और महात्मा गांधी की शिक्षाओं का उल्लेख किया, जो वर्तमान समय में युवा विकास के लिए प्रासंगिक हैं:

भगवान बुद्ध: उनकी माइंडफुलनेस की शिक्षा युवाओं को भावनात्मक संतुलन और आत्म-जागरूकता प्राप्त करने में मदद करती है।

भगवान महावीर: अहिंसा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता युवाओं को शांति और रचनात्मकता से समस्याओं का समाधान करना सिखाती है।

गुरु नानक: उनकी सेवा की भावना (Seva) युवाओं को समाज की उन्नति के लिए निःस्वार्थ योगदान देने की प्रेरणा देती है।

महात्मा गांधी: स्वदेशी और स्वावलंबन पर उनका जोर युवाओं को स्थानीय समाधानों को अपनाने और ईमानदारी से नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करता है।

समापन और प्रशंसा

वेबिनार का समापन संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र से हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने युवाओं की भागीदारी और विकास पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सभी ने सोसाइटी फॉर एम्पावरमेंट के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने इस विषय पर विचारोत्तेजक चर्चा और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

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